सोमवार को सिंह दरबार में हुई घटनाओं से संवैधानिक संस्था दबाव में आ गई, एक विदेशी राजदूत नाराज़ हो गए, और एक लंबे समय से अटकी जाँच अचानक तेज़ी से आगे बढ़ी। अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय से आए दबाव के कारण पासपोर्ट जाँच में गति आई है। इस दबाव के परिणामस्वरूप, एक संवैधानिक निकाय को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। साथ ही, एक विदेशी राजदूत इस मामले में हुई प्रगति से असंतुष्ट हैं। जाँच में तेज़ी आने से पहले यह मामला लंबे समय से लंबित था। यह घटनाक्रम सरकार की जवाबदेही और स्वतंत्र जाँच प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल, इस मामले में आगे की जानकारी का इंतजार है।
