पत्रकार किशोर श्रेष्ठ की संभावित गिरफ्तारी के डर से, उन्होंने प्रेस परिषद द्वारा शिकायत की समीक्षा किए जाने के दौरान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने गिरफ्तारी से रोकने का आदेश दिया है। श्रेष्ठ ने गिरफ्तारी रोकने के लिए निषेधाज्ञा याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने से रोक दिया। यह आदेश प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इस मामले से पता चलता है कि न्यायिक प्रक्रिया का पालन किए बिना पत्रकारों को गिरफ्तार करने से रोकने के लिए न्यायालय सतर्क हैं। यह निर्णय पत्रकारों को अपनी ड्यूटी बिना किसी डर के निभाने में मदद करेगा।