काठमांडू जिला अदालत ने पूर्व संपादक सरोज मिश्रा को मानहानि के एक मामले में चार महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह मामला 2023 में प्रकाशित एक रिपोर्ट से संबंधित है। मीडिया समूहों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे प्रेस स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा झटका बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला पत्रकारों को डराने और स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने का प्रयास है। इस फैसले से नेपाल में मीडिया जगत में निराशा और चिंता का माहौल है। कई पत्रकारों ने इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। वे सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आग्रह कर रहे हैं। यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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