नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों में से केवल दस में से एक ही शव की पहचान हो पाई है। पहचान की कमी के कारण, पीड़ित परिवारों ने बिना शवों के ही अंतिम संस्कार आयोजित करने का सहारा लिया है। यह स्थिति बाढ़ में लापता हुए लोगों के प्रति शोक व्यक्त करने और उन्हें सम्मान देने का एक मार्मिक तरीका है। अधिकारियों का कहना है कि शवों की पहचान की प्रक्रिया धीमी है, क्योंकि कई शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस त्रासदी में बड़ी संख्या में लोग लापता हैं, जिससे परिवारों की अनिश्चितता और बढ़ गई है। परिवारों का मानना है कि इस प्रकार का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार उन्हें भावनात्मक रूप से थोड़ा शांति प्रदान करेगा। सरकार ने लापता लोगों की तलाश जारी रखने और प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने का वादा किया है।

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