नेपाल सरकार ने बेघर और अनधिकृत रूप से बसे लोगों की डिजिटल पहचान की प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया उन लोगों पर केंद्रित है जो निर्धारित पुनर्वास केंद्रों के बाहर रह रहे हैं। पहले चरण में केवल अस्थायी आश्रयों में रहने वालों की पहचान की गई थी, लेकिन अब यह दायरा बढ़ाया गया है। आनंद सिंह भाट, एकीकृत बागमती सभ्यता विकास उच्च-स्तरीय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के अनुसार, यह पुनर्वास प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल का उद्देश्य बेघर लोगों के डेटा का अद्यतन रिकॉर्ड बनाना है ताकि उन्हें उचित सहायता और पुनर्वास प्रदान किया जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि सभी पात्र लोगों को इस प्रक्रिया के माध्यम से लाभ मिले। यह कदम बेघर लोगों की पहचान और उनकी सहायता करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
