काठमांडू के थापाथली और शंकमूल बस्तियों से बेघर हुए परिवारों को निकाले गए छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन वे अभी भी होल्डिंग सेंटरों में रहने को मजबूर हैं। उनके पास नौकरी नहीं है और स्थायी आवास का कोई स्पष्ट रास्ता भी नहीं दिख रहा है। दशैं का त्योहार आने वाला है, लेकिन उनके लिए ख़ुशी मनाने जैसा कुछ भी नहीं है। ये परिवार अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन उन्हें जल्द से जल्द उचित आवास प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया धीमी है। इन परिवारों की दुर्दशा दशैं जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के दौरान और भी अधिक महसूस होती है। वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और सरकार से सहायता की उम्मीद कर रहे हैं।