नेपाल और तिब्बत सीमा पर हुए हिमस्खलन के बाद, 900 से ज़्यादा हाइड्रोइलेक्ट्रिक श्रमिकों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल, श्रमिकों तक पहुंचने के लिए नियंत्रित विस्फोटों का उपयोग करके सुरंगों को खाली करने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह एक चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान है, क्योंकि सुरंगों में मलबे की मात्रा बहुत अधिक है। फंसे हुए श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहा है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय सहायता की भी मांग की जा सकती है। इस घटना से क्षेत्र में हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।