नाज़ी जर्मनी ने अपनी सांस्कृतिक और नस्लीय श्रेष्ठता के विचारों को सही ठहराने के लिए प्राचीन ग्रीस के इतिहास और शास्त्रीय अतीत का उपयोग किया। नाज़ी प्रचार ने कला और वास्तुकला में प्राचीन ग्रीक तत्वों को अपनाया, जैसे कि अर्नो ब्रेकर और जोसेफ थोराक की "नियो-ग्रीक" मूर्तियां और पॉल ट्रोस्ट द्वारा नियो-डोरिक वास्तुकला। यह रणनीति नाज़ी शासन को एक गौरवशाली अतीत से जोड़ने और अपनी विचारधारा को वैधता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इतिहासकारों का मानना है कि यह प्राचीन ग्रीक संस्कृति का जानबूझकर दुरुपयोग था, जिसका उद्देश्य नाज़ी विचारधारा को बढ़ावा देना था। इस सांस्कृतिक विनियोग ने नाज़ी जर्मनी की विचारधारा और कलात्मक अभिव्यक्ति के बीच एक जटिल संबंध को उजागर किया। यह दर्शाता है कि कैसे इतिहास को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए हेरफेर किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में, प्राचीन ग्रीस की विरासत को नाज़ी प्रचार के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया गया।