पेरू के दक्षिणी रेगिस्तान में नाज़्का रेखाएँ पुरातत्व की सबसे बड़ी पहेलियों में से एक हैं। लगभग 500 ईसा पूर्व और 500 ईस्वी के बीच बनाई गई ये विशाल भू-आकृतियाँ, जानवरों, मानव आकृतियों और ज्यामितीय रूपों को दर्शाती हैं। इन्हें केवल आकाश या आसपास की ऊँचाइयों से ही पूरी तरह से देखा जा सकता है। इन रेखाओं के अर्थ को लेकर कई सिद्धांत हैं, जिसमें जल की पूजा से लेकर संभावित खगोलीय कैलेंडर और यहाँ तक कि अलौकिक प्राणियों की परिकल्पनाएँ भी शामिल हैं। जर्मन गणितज्ञ मारिया रीचे के प्रयासों ने इस स्थल की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है। नाज़्का रेखाएँ प्राचीन संस्कृतियों की इंजीनियरिंग और कलात्मक प्रतिभा का अद्भुत उदाहरण हैं।