अमेरिकी नौसेना ने शीत युद्ध के बाद एस-3 वाइकिंग विमान को सेवामुक्त कर दिया है। यह विमान पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम था। अब, अमेरिकी नौसेना के पास रूसी और चीनी पनडुब्बियों के ख़िलाफ़ लंबी दूरी तक प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता कम हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय एक रणनीतिक भूल हो सकती है, क्योंकि यह अमेरिकी नौसेना को संभावित खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। नए विमान, जो एस-3 वाइकिंग की जगह ले रहे हैं, में समान क्षमताएं नहीं हैं। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की स्थिति कमजोर हो सकती है। यह कदम अमेरिकी रक्षा नीति में बदलाव का संकेत देता है।
