एक विशेष सुविधा प्राप्त देश होने के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में यह समझ कमज़ोर पड़ रही है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर नियंत्रण हटाने से सुरक्षा नहीं बढ़ेगी। बल्कि, इससे सभी नागरिक अधिक असुरक्षित हो सकते हैं। यह विरोधाभास देश के भीतर एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है। विशेषाधिकार की भावना कुछ लोगों को संभावित खतरों के प्रति अंधा बना सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर उचित नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक है। नियंत्रण हटाने से सत्ता का दुरुपयोग और मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। इस स्थिति में, देश की सुरक्षा और नागरिकों की स्वतंत्रता दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। यह ज़रूरी है कि समाज इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करे।
