लेखक ने अपनी ढाई साल की राष्ट्रीय सेवा के शुरुआती दौर की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने इस दौरान कई चुनौतियों का सामना किया। इन चुनौतियों के बावजूद, वह उन अनुभवों और सीखों को महत्व देते हैं जो उन्होंने प्राप्त कीं। राष्ट्रीय सेवा ने न केवल उन्हें व्यक्तिगत रूप से विकसित किया, बल्कि उन्हें अपनेपन की भावना से भी जोड़ा। इस दौरान बने दोस्ती के रिश्तों को वह जीवन भर के लिए संजो कर रखेंगे। यह अनुभव उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, जिसने उन्हें आकार दिया और उन्हें बेहतर इंसान बनाया। लेखक का मानना है कि राष्ट्रीय सेवा ने उनके जीवन में एक अमिट छाप छोड़ी है।

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