नारायणगंज शहर के চাষাঢ়া में आतंकवादियों की गोलीबारी में मारे गए शुभ चंद्र दास, जिन्हें मो. बिल्लाल के नाम से भी जाना जाता था (उम्र ३२), के धार्मिक पहचान को लेकर विवाद होने के कारण, उनकी मृत्यु के छह दिन बाद भी उनका अंतिम संस्कार या दाह संस्कार नहीं हो पाया है। मृतक के माता-पिता के बीच धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर खींचतान चल रही है, जिसके कारण अंतिम संस्कार में देरी हो रही है। परिवार में कुछ लोग दफनाने की इच्छा रखते हैं, जबकि अन्य दाह संस्कार करने पर जोर दे रहे हैं। यह विवाद शव को হিমঘর (शीतगृह) में रखने का कारण बना है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन मामले को सुलझाने और परिवार के सदस्यों से बात कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और अंतिम संस्कार कब होगा यह अभी भी अनिश्चित है। इस घटना ने নারায়ণগঞ্জ में धार्मिक सहिष्णुता और परिवार के भीतर मतभेदों से संबंधित महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।