म्यांमार की सैन्य सरकार ने चुनावी बहिष्कार करने वाले कार्यकर्ताओं को अधिकतम ३७ साल तक की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला उन सभी विरोधों को दबाने के लिए सरकार की दृढ़ता को दर्शाता है जो व्यापक रूप से अमान्य माने जाने वाले चुनावी प्रक्रिया का विरोध करते हैं। इन कार्यकर्ताओं पर सरकार विरोधी गतिविधियों और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया गया था। यह सजा म्यांमार में लोकतंत्र समर्थक आवाजों पर बढ़ते दमन का संकेत है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है और कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की है। सैन्य सरकार ने पिछले साल तख्तापलट के बाद से ही देश में विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से दबा दिया है। यह कार्रवाई आगामी चुनावों में जनता की भागीदारी को कम करने के लिए की जा रही है।