किसी की प्रशंसा मिलने पर, एक मुसलमान को याद रखना चाहिए कि उसके जीवन में कई पहलू हैं जो दूसरों को ज्ञात नहीं हैं। अल्लाह उसकी खुली और छिपी दोनों बातों से अवगत है। प्रशंसा मिलने पर घमंड से बचना चाहिए और इसे अल्लाह की नेमत समझना चाहिए। यह समझना महत्वपूर्ण है कि अल्लाह ही वास्तविक जज है, न कि लोग। इस परिस्थिति में विनम्र बने रहना और अल्लाह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना आवश्यक है। प्रशंसा को अपनी भलाई का प्रमाण न मानें, बल्कि इसे अल्लाह की ओर से मार्गदर्शन के रूप में लें। हमेशा आत्म-जागरूक रहें और अपने कार्यों का मूल्यांकन करते रहें।