यूरोपीय संग्रहालयों में हो रही चोरियों का स्वरूप बदल रहा है। हाल के वर्षों में, ये चोरियां अधिक हिंसक हो गई हैं और इनका लक्ष्य अधिक मूल्यवान वस्तुएं हैं। उदाहरण के लिए, लूव्र संग्रहालय में हुई चोरी इस नए चलन को दर्शाती है। चोर अब 'अवसरवादी' हैं, जो कला के बढ़ते काले बाजार का फायदा उठा रहे हैं। ये हमले न केवल कला की धरोहर को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि सुरक्षा उपायों पर भी सवाल उठाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कला बाजार के विस्तार के कारण चोरों को महंगी कलाकृतियों को बेचने के अधिक अवसर मिल रहे हैं, जिससे इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। संग्रहालयों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।