पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की संसद में सदियों पुरानी परंपरा, प्रार्थना को समाप्त करने की मांग उठ रही है। लेबर पार्टी के एक सांसद ने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले पढ़ी जाने वाली ईसाई प्रार्थना को हटाने का प्रस्ताव रखा है। उनका तर्क है कि यह धर्मनिरपेक्ष संसद में उचित नहीं है। इस प्रस्ताव से संसद में बहस छिड़ गई है, क्योंकि कुछ लोग इसे परंपरा का उल्लंघन मानते हैं, जबकि अन्य इसे समावेशी दृष्टिकोण का समर्थन करने के रूप में देखते हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की संसद में यह प्रार्थना लंबे समय से चली आ रही है और इसे कई सदस्यों द्वारा महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मुद्दे पर आगे चर्चा और मतदान होने की संभावना है। सांसद का कहना है कि संसद सभी धर्मों और विश्वासों के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए किसी एक धर्म से जुड़ी प्रार्थना उचित नहीं है।