संसद में सत्तारूढ़ दल के सांसद अब्दुल मलिक ने चुनाव के दौरान मतदाताओं को दिए जाने वाले झूठे वादों का एक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे चुनाव के समय एक बुजुर्ग महिला को ‘कोमल पेय’ देने का वादा किया गया था, लेकिन चुनाव के बाद उसे भुला दिया गया। सांसद ने कहा कि कुछ नेता चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिखाते हैं, लेकिन बाद में वे अपने वादे भूल जाते हैं। यह घटनाक्रम 18 जून को तेरहवीं राष्ट्रीय संसद के दूसरे और पहले बजट सत्र के दौरान सामने आया। इस टिप्पणी ने चुनावी वादों की विश्वसनीयता और राजनीतिक नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सांसद ने इस उदाहरण को देकर राजनीतिक संस्कृति में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। यह मुद्दा संसद में चर्चा का विषय बना और सदस्यों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
