मोरक्को में सितंबर के पहले दस दिनों में दस से अधिक नए नाटकों की प्रस्तुति ने सांस्कृतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। यह बहस सांस्कृतिक प्रोग्रामिंग के उद्देश्य, व्यापक दर्शकों तक पहुंच और सार्वजनिक समर्थन के लक्ष्यों पर केंद्रित है। सांस्कृतिक मामलों की एक पत्रकार, सईदा शरीफ ने फेसबुक पर इस घटना को ‘एक उन्मादी दौड़’ बताया है। उनका मानना है कि कई नाटकों का एक साथ प्रदर्शन आम दर्शकों तक पहुंच को सीमित कर सकता है। आलोचकों का तर्क है कि सार्वजनिक धन का उपयोग इस तरह से किया जाना चाहिए जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। इस स्थिति ने सरकारी समर्थन की प्रभावशीलता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को जनता तक पहुंचाने के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुद्दे पर आगे चर्चा और समाधान की आवश्यकता है।