प्रधानमंत्री मोदी की पाकिस्तान नीति में निरंतरता देखी जा सकती है, लेकिन इसमें कूटनीति और टकराव दोनों का मिश्रण रहा है। 2014 में सत्ता संभालने के बाद, मोदी ने शुरू में पाकिस्तान के साथ संबंधों को सुधारने का प्रयास किया, जिसमें कई द्विपक्षीय बैठकें शामिल थीं। हालांकि, उरी और पुलवामा जैसे हमलों के बाद संबंधों में तेजी से गिरावट आई। इसके बाद, भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई की, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। हाल के वर्षों में, मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की पेशकश की है, लेकिन सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की कार्रवाई पर संदेह जताया है। समग्र रूप से, मोदी की पाकिस्तान नीति संबंधों को स्थिर रखने के प्रयास और आतंकवाद के मुद्दे पर दृढ़ रुख के बीच झूलती रही है। भविष्य में, भारत-पाकिस्तान संबंधों में सुधार के लिए पाकिस्तान से सार्थक कदम उठाने की उम्मीद है।