आधुनिक रिश्तों में वफ़ादारी की परिभाषा बदल रही है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, 'सिर्फ मैसेजिंग' जैसे नए व्यवहार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के साथ भावनात्मक संबंध, रिश्तों में अविश्वास पैदा कर सकते हैं। ये 'माइक्रो-विश्वासघात' पारंपरिक विश्वासघात के समान ही हानिकारक हैं। चेक मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मार्टिन गैल्बावी के अनुसार, किसी एक व्यक्ति के साथ रहने का अर्थ है अन्य संभावनाओं को त्यागना। रिश्तों में संतुष्टि के लिए सीमाओं का सम्मान और स्पष्ट संवाद आवश्यक है। यह स्थिति रिश्तों में जटिलता और भावनात्मक चुनौतियों को बढ़ाती है। गैल्बावी का मानना है कि ये मुद्दे रिश्तों में गहरे निहित मनोवैज्ञानिक तंत्रों से जुड़े हैं।
