पिछले एक सप्ताह में देश भर में दुष्प्रचार के कुल १०२ मामले सामने आए हैं, जिनकी पहचान पाँच तथ्य-जाँच संगठनों ने की है। इन मामलों में से ५४ वीडियो के माध्यम से फैलाए गए थे, जो कि एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। इसका मतलब है कि झूठी सूचनाओं को फैलाने के लिए वीडियो एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। तथ्य-जाँच करने वाली संस्थाओं ने इस बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। वीडियो के माध्यम से दुष्प्रचार फैलाने की यह रणनीति अधिक लोगों तक पहुँचने और तेजी से प्रभाव डालने में सक्षम है। इस स्थिति से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाना और सूचना की सत्यता की जाँच करना आवश्यक है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस समस्या से निपटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
