मिनेसोटा के एक किशोर, इवान मॉरिस ने कृमि का उपयोग करके एक कम लागत वाली प्रणाली विकसित की है जो दौरे को दबाने में मदद करती है। इस प्रणाली ने कृमि में दौरे की पुनरावृत्ति को 70.1% तक कम कर दिया है। मॉरिस के इस प्रोजेक्ट में सोनोजेनेटिक्स और कंप्यूटर-नियंत्रित क्लोज्ड-लूप डिटेक्शन विधि का उपयोग किया गया है। उनके इस अभिनव जीवन विज्ञान अनुसंधान के लिए उन्हें एक महत्वपूर्ण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह प्रणाली तंत्रिका विज्ञान के अध्ययन के लिए एक तेज़ और सस्ता मंच प्रदान करती है। मॉरिस का यह कार्य भविष्य में मानव रोगों के उपचार में भी सहायक हो सकता है। यह शोध वैज्ञानिक समुदाय में आशा की किरण लेकर आया है।