एक मंत्री द्वारा किए गए कुछ टिप्पणियों के कारण छह पुलिस जांचकर्ताओं ने अदालत में मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि मंत्री की टिप्पणियों ने उन्हें गलत तरीके से संगठित अपराध से जोड़ दिया। अदालत ने मंत्री को अपनी टिप्पणियों की जांच करने में विफल रहने के कारण मामले में हार का सामना करना पड़ा। अब, अदालत ने मामले की दोबारा सुनवाई का आदेश दिया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि मंत्री की टिप्पणियों से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और वे मुआवजे और माफी की मांग कर रहे हैं। अदालत ने मंत्री को भविष्य में इस तरह की टिप्पणियों से बचने की सलाह दी है। यह मामला सार्वजनिक हस्तियों द्वारा की जाने वाली टिप्पणियों की जिम्मेदारी पर प्रकाश डालता है।