प्रवासी श्रमिकों ने पिछले रविवार को अपनी कार्य परिस्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन किया, जहाँ कई मामलों में उन्हें सप्ताह में सात दिन, चौबीस घंटे काम करना पड़ता है। नियोक्ताओं ने शून्य-शुल्क प्रणाली का विरोध करना शुरू कर दिया है, जिससे श्रमिकों की भर्ती लागत बढ़ सकती है। श्रमिक लगातार काम करने के लंबे घंटों और आराम की कमी से परेशान हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। नियोक्ताओं का तर्क है कि शून्य-शुल्क प्रणाली से उनकी लागत बढ़ेगी और वे श्रमिकों को नियुक्त करने में असमर्थ होंगे। सरकार इस मामले में मध्यस्थता करने की कोशिश कर रही है ताकि श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा की जा सके। यह मुद्दा प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और उचित श्रम प्रथाओं के बारे में व्यापक बहस का हिस्सा है।