मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में फिर से वृद्धि हुई है। इस वृद्धि का असर जहाज़ और विमानन उद्योगों पर असमान रूप से पड़ रहा है। जहाज़ उद्योग के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उच्च तेल कीमतें माल ढुलाई की लागत बढ़ाती हैं। वहीं, विमानन उद्योग को अपेक्षाकृत कम नुकसान होने की संभावना है, क्योंकि वे ईंधन अधिभार के माध्यम से कुछ लागत को उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में स्थिति बिगड़ने पर तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, बाजार इस स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है और आगे की घटनाओं का इंतजार कर रहा है।