रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के मद्देनज़र नाटो की एकजुटता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विदेशी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी देशों की सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, बल्कि उन्हें निशाना बनाती है। मेदवेदेव ने विदेशी सैन्य उपस्थिति को कम करने का आह्वान किया है, यह तर्क देते हुए कि इससे क्षेत्र में स्थिरता आ सकती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मध्य पूर्व में हो रही घटनाओं से वैश्विक युद्ध का खतरा बढ़ रहा है। मेदवेदेव ने नाटो की प्रभावशीलता पर संदेह व्यक्त किया है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका मानना है कि विदेशी हस्तक्षेप के बजाय, देशों को अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करनी चाहिए। इस बयान से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है।
