आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज पर कर की दर को दोगुना कर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इस फैसले से लाखों मध्यम वर्ग के परिवारों और पेंशनधारियों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। पहले यह कर दर 5 प्रतिशत थी। इस बदलाव के कारण, बचत योजनाओं से होने वाली आय पर कर की कटौती कम हो जाएगी, जिससे निवेशकों को कम लाभ मिलेगा। सरकार का यह कदम राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बचत योजनाओं में निवेश कम हो सकता है। वित्त विधेयक 2026 में इस प्रस्ताव को शामिल किया गया है, जिसके बाद इस पर बहस होने की संभावना है। इस निर्णय से बचत योजनाओं के निवेशकों में चिंता का माहौल है।