सरकार ने आपूर्ति और मूल्य वृद्धि के दबाव के कारण वर्ष के अंत तक राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति के अपने अनुमानों को बढ़ा दिया है। वित्त मंत्रालय ने पहले 5.8% रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन अब मुद्रास्फीति का लक्ष्य बढ़ाकर 6% कर दिया गया है। यह समायोजन विभिन्न आर्थिक कारकों के कारण किया गया है, जिनमें आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में लगातार वृद्धि शामिल है। सरकार का यह कदम आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में उठाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह संशोधन वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और घरेलू परिस्थितियों को दर्शाता है। इस बदलाव से आगामी महीनों में आर्थिक नीतियों पर असर पड़ सकता है। सरकार अब इन चुनौतियों से निपटने के लिए अतिरिक्त उपायों पर विचार कर सकती है।