ओकलैंड की अदालत में अभियोजकों ने मेटा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि कंपनी ने इंस्टाग्राम और फेसबुक को इस तरह से डिज़ाइन किया कि बच्चे इनकी आदी हो जाएं। उनका दावा है कि मेटा ने जानबूझकर बच्चों के मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का फायदा उठाया, जिससे वे इन प्लेटफ़ॉर्म पर अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित हुए। अभियोजकों का यह भी आरोप है कि मेटा ने जनता को इन प्लेटफ़ॉर्म के संभावित हानिकारक प्रभावों के बारे में गुमराह किया। यह मामला सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। मेटा पर बच्चों को लत लगाने और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है। इस मुकदमे का परिणाम सोशल मीडिया के उपयोग को विनियमित करने के लिए भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकता है। अदालत अब इस मामले की आगे सुनवाई करेगी और मेटा का पक्ष सुनेगी।