एंजेला मर्केल ने यूरोप की क्षमताओं को कम आंका था। उनका मानना है कि उदारवादी शक्तियाँ प्रवास के मुद्दे से निपटने में सक्षम नहीं हैं। इस स्थिति के कारण दक्षिणपंथी दलों को मजबूत होने का अवसर मिल गया है। मर्केल की यह टिप्पणी उनके 2015 के बयान "हम यह कर सकते हैं" के विपरीत है, जिसे व्यापक रूप से उनकी उदारवादी आप्रवासन नीति का प्रतीक माना गया था। उनका कहना है कि प्रवास की चुनौतियों का सामना करने के लिए यूरोप पर्याप्त रूप से तैयार नहीं था। इस विश्लेषण से पता चलता है कि प्रवास एक जटिल मुद्दा है जिसने यूरोपीय राजनीति को ध्रुवीकृत किया है और दक्षिणपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा दिया है। मर्केल की यह स्वीकारोक्ति यूरोपीय संघ के भीतर प्रवास नीति पर चल रही बहस को और तेज कर सकती है।