एक नए अध्ययन के अनुसार, एनीमिया से ग्रस्त माताओं द्वारा जन्म लेने वाले शिशुओं के मस्तिष्क का आकार छोटा होता है। विशेष रूप से, मस्तिष्क के वे भाग जो गति, सीखने और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं, प्रभावित होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अंतर एक वर्ष की आयु में ही पता चल जाता है। इससे बच्चों के स्कूल जाने पर संज्ञानात्मक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह अध्ययन एनीमिया की गंभीरता और मस्तिष्क के विकास के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध दर्शाता है। शोधकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के उपचार और प्रबंधन के महत्व पर ज़ोर दिया है ताकि बच्चों में स्वस्थ मस्तिष्क विकास सुनिश्चित किया जा सके। यह निष्कर्ष वैश्विक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ मातृ एनीमिया व्यापक है।