नई फिल्म ‘मास्टर्स ऑफ़ द यूनिवर्स’ में कहानी कहने की क्षमता पर दर्शकों की समझ पर सवाल उठाए गए हैं। समीक्षकों का मानना है कि फिल्म जटिल कथानक और पात्रों के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं देती, बल्कि दर्शकों को सीधे-सीधे निर्देश देने पर अधिक निर्भर करती है। फिल्म में नायक के प्रेरणाओं और कार्यों को स्पष्ट रूप से समझाने की कोशिश की गई है, जिससे कहानी की गहराई कम हो जाती है। यह दृष्टिकोण फिल्म को कमजोर बनाता है और दर्शकों को कहानी से भावनात्मक रूप से जुड़ने से रोकता है। फिल्म में एक्शन दृश्यों की भरमार है, लेकिन वे कहानी के कमजोर आधार को ढकने में विफल रहते हैं। कुल मिलाकर, फिल्म एक निराशाजनक अनुभव प्रदान करती है, जो अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं है। यह फिल्म उन दर्शकों को निराश कर सकती है जो एक विचारोत्तेजक और भावनात्मक रूप से संतोषजनक कहानी की उम्मीद कर रहे थे।
