राष्ट्रपति मार्कोस ने अपने अंतिम राष्ट्र के नाम संबोधन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों और लक्षणों को जानबूझकर छोड़ दिया। इस संबोधन में, उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं को दरकिनार कर दिया, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि कुछ संवेदनशील विषयों पर बात करने से बचा गया, संभवतः राजनीतिक कारणों से। भाषण में आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख था, लेकिन गहराई से नहीं गया। स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों को भी पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया। यह संबोधन राष्ट्रपति मार्कोस के कार्यकाल के अंत की ओर संकेत करता है और भविष्य की नीतियों के लिए एक मंच तैयार करता है। इस भाषण में शामिल और छोड़ी गई बातों का विश्लेषण देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।