स्वीडन में, एक व्यक्ति को सहमति के बिना यौन संबंध बनाने के आरोप में तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने पाया कि आरोपी ने कंडोम के उपयोग की आवश्यकता को दरकिनार कर दिया, जिससे पीड़ित महिला को घबराहट हुई। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि कंडोम की अनिवार्यता को दरकिनार करने का कार्य यौन उत्पीड़न के समान है, क्योंकि इससे पीड़ित को अपनी सुरक्षा और नियंत्रण खोने का डर महसूस होता है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार किया और इसे बलात्कार के अपराध के रूप में माना। पीड़िता ने घटना के दौरान घबराहट महसूस करने की बात कही थी। यह मामला सहमति और यौन संबंधों में सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालता है। अदालत का फैसला स्वीडन में यौन अपराधों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है।