डेनमार्क की संसद (Folketinget) में अब पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग बराबर होने के बावजूद, अध्ययन से पता चला है कि पुरुष सांसदों को बहस में बोलने के लिए अधिक समय मिलता है। यह अंतर मुख्य रूप से वक्ताओं के आवंटन के तरीके से प्रभावित होता है। संसद में विभिन्न समितियों के प्रमुखों की भूमिका महत्वपूर्ण है, और यह देखा गया है कि अक्सर पुरुष सांसदों को अधिक महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी जाती हैं। मेटे अबिल्डगार्ड का कहना है कि समूह नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे लिंग, उम्र या अनुभव के आधार पर सांसदों को भूमिकाएं न सौंपें। इस अध्ययन से संसद में लैंगिक समानता की दिशा में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है। वक्ताओं के उचित आवंटन से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले। यह लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और संसद की बहस को अधिक समावेशी बनाने में मदद करेगा।
