मलेशिया में, एक प्रकाशक ने एक पूर्व सदस्य के संस्मरण पर प्रतिबंध लगाने के सरकारी फैसले को चुनौती देने के लिए न्यायालय का रुख किया है। यह प्रतिबंध 'गेराकबुडाया' द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों पर लगाया गया है। प्रकाशक चोंग टोन सिन के अनुसार, यह प्रतिबंध अतार्किक है क्योंकि ये पुस्तकें वर्षों से बाजार में उपलब्ध हैं। सरकार ने अभी तक प्रतिबंध का कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह पुस्तक में दिए गए राजनीतिक विचारों से संबंधित हो सकता है। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी सेंसरशिप के मुद्दे को उजागर करता है। अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी और निर्णय लेगी। इस प्रतिबंध से देश में साहित्यिक और राजनीतिक बहस पर असर पड़ सकता है।