कुआलालंपुर में आठ पीकेआर सांसदों ने अटॉर्नी जनरल और पब्लिक प्रोसेक्यूटर के पदों को अलग करने के लिए प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों में एक मजबूत संसदीय समीक्षा प्रक्रिया की मांग की है। सांसदों का कहना है कि संसद को केवल टिप्पणी करने के अधिकार के बजाय, पब्लिक प्रोसेक्यूटर की नियुक्ति की जांच करने का वास्तविक अधिकार मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। ये सांसद संशोधन प्रक्रिया में संसद की भूमिका को अधिक महत्वपूर्ण बनाने के पक्षधर हैं। उनका मानना है कि पब्लिक प्रोसेक्यूटर की नियुक्ति में संसद की स्वीकृति आवश्यक होनी चाहिए। इस कदम से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को भी बढ़ावा मिलेगा। पीकेआर सांसदों ने सरकार से इस दिशा में विचार करने का आग्रह किया है।