मलेशिया के प्रधानमंत्री द्वारा शरणार्थी समर्थन से पीछे हटने को विशेषज्ञों ने एक “चुनाव युक्ति” बताया है। ऐसा माना जा रहा है कि यह कदम देश में मलय बहुसंख्यक समुदाय के बीच समर्थन बढ़ाने के लिए उठाया गया है। इस फैसले से म्यांमार के शरणार्थियों पर असर पड़ेगा, जिन्हें पहले मलेशिया में आश्रय दिया गया था। आलोचकों का कहना है कि यह यू-टर्न मलेशिया की मानवीय प्रतिबद्धताओं के विपरीत है। इस कदम से देश की अंतर्राष्ट्रीय छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मलेशिया में आगामी चुनावों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस बदलाव से म्यांमार में पहले से ही नाजुक स्थिति और भी बिगड़ सकती है।