तुलसी मनोगरन ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री पर कटौती के लिए आलोचना क्यों की गई, और कहा कि अहमद ज़ाहिद हमीदी को उप प्रधानमंत्री के रूप में सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने पूछा कि ज़ाहिद ने पहले इस कटौती पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। मनोगरन ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रिमंडल के सदस्यों को सरकार के फैसलों का सार्वजनिक रूप से समर्थन करना चाहिए, भले ही वे व्यक्तिगत रूप से असहमत हों। यह मामला बुडी95 कटौती से संबंधित है, जो हाल ही में विवाद का विषय बना है। ज़ाहिद हमीदी की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मनोगरन ने इस मुद्दे पर स्पष्टता और जवाबदेही की मांग की है। यह घटना सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित करती है।