पूर्व सांसद टोनी पुआ ने सवाल उठाया है कि क्या राजघराने के सदस्यों पर राजनीतिक मामलों में प्रतिक्रिया देने वाले लोगों पर राजद्रोह कानून लागू किया जा सकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए पूछा है कि क्या इस तरह की प्रतिक्रियाओं को राजद्रोह माना जाएगा। यह सवाल मलेशिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजशाही के बीच संबंधों को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है। पुआ का यह प्रश्न विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मलेशिया में राजद्रोह कानून का इस्तेमाल अक्सर राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए किया जाता रहा है। इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्भर करता है कि प्रतिक्रिया की प्रकृति क्या है और क्या इससे सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा है। पुआ ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य राजघराने की आलोचना करना नहीं है, बल्कि यह जानना है कि कानून किस हद तक लागू हो सकता है।
