मलेशिया ने म्यांमार के प्रवासियों को वापस भेजना शुरू कर दिया है। इनमें रोहिंग्या समुदाय के लोग भी शामिल हैं, जिन्हें म्यांमार की नागरिकता से वंचित किया गया है और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। न मलेशिया और न ही म्यांमार की सैन्य सरकार ने यह खुलासा किया है कि “स्वैच्छिक” वापसी में कितने रोहिंग्या शामिल होंगे। यह कदम रोहिंग्या शरणार्थियों के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ाता है, जिन्हें अपने गृह देश में सुरक्षा की गारंटी नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस वापसी पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं। इस प्रक्रिया की स्वैच्छिक प्रकृति पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि रोहिंग्या समुदाय पर वापस लौटने का दबाव हो सकता है। म्यांमार में रोहिंग्याओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।