ब्रिटिश अख़बार टेलीग्राफ़ के अनुसार, इमैनुएल मैक्रों के फ्रांस के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद यूक्रेन को समर्थन देने वाले नाटो देशों में उथल-पुथल की स्थिति आ सकती है। मैक्रों के जाने से यूक्रेन के प्रति नकारात्मक रुख रखने वाले कट्टरपंथियों के लिए दरवाज़ा खुल सकता है। इससे यूक्रेन को मिलने वाली सहायता में कमी आने की आशंका है। टेलीग्राफ़ का कहना है कि मैक्रों यूक्रेन समर्थक थे और उनकी अनुपस्थिति नाटो के भीतर एकता को खतरे में डाल सकती है। यह स्थिति यूक्रेन के लिए एक बड़ी समस्या पैदा कर सकती है, क्योंकि उसे पश्चिमी देशों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मैक्रों के उत्तराधिकारी का दृष्टिकोण यूक्रेन युद्ध के भविष्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नाटो देशों के बीच मतभेद बढ़ने से यूक्रेन की सहायता करने की रणनीति पर असर पड़ सकता है।