अपोलो 15 के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर असामान्य हरे रंग के कण मिले थे। बाद में, इन कणों को ज्वालामुखी कांच के मोती के रूप में पहचाना गया, जिनमें पानी फंसा हुआ था। शोधकर्ताओं ने इन छोटे मोतियों के भीतर हाइड्रोजन की खोज की, जिससे यह साबित हुआ कि चंद्रमा पर पानी मौजूद था। यह खोज इस लंबे समय से चली आ रही धारणा को चुनौती देती है कि चंद्रमा बेहद सूखा है। इस खोज से चंद्रमा के आंतरिक भाग में महत्वपूर्ण मात्रा में पानी की उपस्थिति का पता चला है। यह खोज चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास को समझने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पानी भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हो सकता है।