महमदानी ने खोए हुए दस्तावेज़ों को प्रकाशित करने के लिए ३४ मिलियन डॉलर आवंटित किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को झूठ बोला गया और उन्हें बताया गया कि जहरीली हवा में सांस लेना सुरक्षित है, जिसके कारण वे बीमार हुए। यह धनराशि २४ साल पहले खोए हुए दस्तावेज़ों को सार्वजनिक करने के लिए है। इस कदम से ११ सितंबर के बाद वायु गुणवत्ता के बारे में छिपी जानकारी सामने आने की उम्मीद है। महमदानी का मानना ​​है कि जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है और सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। यह घोषणा उन लोगों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो उस समय स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। दस्तावेजों के प्रकाशन से इस त्रासदी के बाद के स्वास्थ्य प्रभावों की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।