लिथुआनिया की संसद ने एक संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दी है जिससे लिथुआनियाई क्षेत्र पर सामूहिक विनाश के हथियारों की तैनाती पर प्रतिबंध हट जाएगा। यह संभावित रूप से बाल्टिक राज्य में सहयोगी देशों के परमाणु हथियारों को तैनात करने का मार्ग खोल सकता है। स्थानीय समाचारों के अनुसार, यह कदम क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। संशोधन को आगे बढ़ने के लिए संसद में आवश्यक बहुमत प्राप्त हुआ। इस फैसले से रूस के साथ तनाव बढ़ने की आशंका है, जो इस क्षेत्र में नाटो की सैन्य उपस्थिति को लेकर पहले ही चिंतित है। लिथुआनिया का कहना है कि यह कदम आत्मरक्षा के लिए आवश्यक है और यह सहयोगी देशों के साथ एकजुटता का संकेत है। इस परिवर्तन के परिणामस्वरूप बाल्टिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है।

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