लाइकेनस्टाइन के शाही परिवार ने उत्तराधिकार के नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब, सिंहासन का उत्तराधिकारी लिंग के बजाय जन्म क्रम के आधार पर तय होगा। इसका मतलब है कि राजकुमार या राजकुमारी, जो भी सबसे पहले पैदा होगा, वह सिंहासन का वारिस होगा। यह बदलाव 'पुरुष प्रधानता' से 'पूर्ण प्रधानता' की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय यूरोपीय राजशाही में समानता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बदलाव भविष्य में सिंहासन के दावेदारों के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इससे लाइकेनस्टाइन की शाही रेखा में अधिक समावेशी और समतावादी दृष्टिकोण आने की उम्मीद है।