लाइपजिग में स्थित एक छोटी कंपनी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) का उपयोग करते हुए अब तक 1500 गैर-फिक्शन और स्व-सहायता पुस्तकें प्रकाशित की हैं। यह कंपनी प्रतिदिन औसतन दो पुस्तकें प्रकाशित करती है, जिनमें सामग्री पूरी तरह से कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा लिखी जाती है। उल्लेखनीय है कि ये पुस्तकें वैज्ञानिक पुस्तकालयों में भी पहुंच रही हैं। इस प्रक्रिया में, सामग्री की सटीकता और गलत जानकारी के लिए जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं। प्रकाशक ने इस बात का खुलासा किया है कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से इतनी अधिक पुस्तकें बनाई जा रही हैं। यह तकनीक प्रकाशन उद्योग में एक नया मोड़ ला सकती है, लेकिन यह कानूनी और नैतिक चिंताओं को भी जन्म देती है। गलत सूचना के प्रसार और बौद्धिक संपदा के अधिकारों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।