केंद्र सरकार के गठन के बाद से संसद में केवल एक नियमित विधेयक ही दर्ज किया गया है, बजट और अध्यादेशों को बदलने वाले विधेयकों को छोड़कर। बजट सत्र के बाद संसद में विधायी कार्यों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। सरकार के पास अभी महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। इससे संसद का कामकाज प्रभावित हो सकता है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा में देरी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जल्द ही नए विधेयकों पर काम करना होगा ताकि संसद का कामकाज सुचारू रूप से चल सके। वर्तमान स्थिति में, संसद में विधायी गतिविधियों की गति धीमी होने की आशंका है। यह स्थिति सरकार के लिए चिंता का विषय हो सकती है क्योंकि इससे नीतिगत सुधारों में बाधा आ सकती है।
