प्रसिद्ध वकील पाऊलो मोता पिंटो ने न्यायिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है। पिंटो, जो ‘50 के घोषणापत्र’ के हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक हैं, का मानना है कि कार्रवाई का केंद्र बिंदु अभियोजन पक्ष (Ministry Público) होना चाहिए, वकीलों को नहीं। उनका तर्क है कि अभियोजन पक्ष की कार्यप्रणाली में सुधार से प्रक्रियाओं को गति मिलेगी। पिंटो ने राजनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया है ताकि न्यायिक प्रणाली में सुधार हो सके। उनका कहना है कि वकीलों पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि अभियोजन पक्ष की जवाबदेही तय करना महत्वपूर्ण है। यह बयान ब्राजील की न्यायिक प्रणाली में सुधार की चल रही बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।